Wednesday, November 19, 2008

समाचारों का सेंसेक्स

हमारे समाचार चैनलों का सेंसेक्स भी नीचे गिरता जा रहा है, हर चैनल अपने आप को सर्वश्रेष्ठ कहते हैं. मुझे ये समझ में नहीं आता की एक साथ कोई दो चैनल कैसे सर्वश्रेष्ठ हो सकते हैं ? कई बार किसी समाचार को एक से अधिक चैनल वाले ये कहते हुए पाए जाते हैं की उस समाचार को सर्वप्रथम उन्हीं का चैनल दिखा रहा है. इसकी जरूरत आख़िर क्यों पडती है ? टी. आर.पी. के लिए ही न ? टी. आर. पी. याने पैसा . मतलब साफ़ है. कभी - कभी तो टी. आर. पी. के लिए ये लोग ( तथाकथित राष्ट्रीय चैनल ) इतना घटिया कार्यक्रम प्रस्तुत कर देते हैं कि ये समझने में दिक्कत होती है कि हम कोई राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल देख रहे हैं.



Tuesday, August 19, 2008

सत्यमेव जयते!

आज मैंने सड़क के किनारे एक बड़ी सी होर्डिंग्स देखी, जिस पर लिखा था " सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं - महात्मा गांधी।" मुझे लगा कि सत्य यदि परेशान हुआ तो यही उसका पराजय है। अभी कुछ दिन पहले एक समाचार चैनल में दिखाए जा रहे निखिल कि कहानी याद आ गई। उसे छः साल पहले जयपुर के एक इन्जिनिएरिंग कॉलेज के सीनियर छात्रों ने रैगिंग के नाम पर सामने से आती हुई रेल पत्री पर दोड़ने के लिए विवश किया (फ़िल्म गुलाम की तर्ज़ पर) जिससे उसकी मौत हो गई। निखिल का लाचार पिता विगत छः वर्षों से न्याय की लडाई लड़ रहा है। आज या अगले दो साल बाद उन्हें तथाकथित न्याय मिल भी जाए तो क्या इसे सत्य की विजय मान लें ?