Tuesday, August 19, 2008
सत्यमेव जयते!
आज मैंने सड़क के किनारे एक बड़ी सी होर्डिंग्स देखी, जिस पर लिखा था " सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं - महात्मा गांधी।" मुझे लगा कि सत्य यदि परेशान हुआ तो यही उसका पराजय है। अभी कुछ दिन पहले एक समाचार चैनल में दिखाए जा रहे निखिल कि कहानी याद आ गई। उसे छः साल पहले जयपुर के एक इन्जिनिएरिंग कॉलेज के सीनियर छात्रों ने रैगिंग के नाम पर सामने से आती हुई रेल पत्री पर दोड़ने के लिए विवश किया (फ़िल्म गुलाम की तर्ज़ पर) जिससे उसकी मौत हो गई। निखिल का लाचार पिता विगत छः वर्षों से न्याय की लडाई लड़ रहा है। आज या अगले दो साल बाद उन्हें तथाकथित न्याय मिल भी जाए तो क्या इसे सत्य की विजय मान लें ?
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2 comments:
काश डॉ. संदीप पाण्डेय वाकई अकेले पड़ जायें तो इस देश में हिंदू- मुसलमान दोनों का भला हो जाएगा... अब ज़रा एक नज़र इधर भी डालें (http://hindi-cns.blogspot.com/2008/09/blog-post_8604.html), तुष्टिकरण की इन्तहा है, कभी कभी एक कौम के लिए ज़रूरत से ज़्यादा चाशनी में डूबा हुआ लेख, किसी न किसी षडयंत्र की बू देता है, पता नही ये हिंदू वादी संगठनों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं , या ध्रुवीकरण करके इनको और मज़बूत बनाना चाहते हैं.
कितनी बार लेख में इन्होने ख़ुद ही कहा है ....बम विस्फोट के लिए चाहे जो भी जिम्मेदार हो..... जो भी आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दे रहा हो इस बात में तो कोई संदेह नहीं है कि सांप्रदायिक आधार पर मतों का जो ध्रुवीकरण हो रहा है ..... बिल्कुल सही, लगता है भाजपा ने इस बार यह काम इन्हे ही सौंप दिया है कि आप उगलो आग हिंदुयों के ख़िलाफ़ और हिंदू और ज्यादा मजबूती से हमे वोट दे ....
माना, हिंदू जिम्मेदार है आतंकी घटनाओं का, पर ऐसे तो इल्जाम लगाना तो नफरत और बढ़ाएगा, बात कुछ हज़म नही होती कि विदेशियों ने कोई साजिश रची ही नही इस देश में नफरत फैलाने कि इनके हिसाब से तो दुनियाभर में आतंकी गतिविधियाँ हिंदुस्तान के हिंदू कर रहे हैं .... ऐसे लोगो कि खालिश कल्पनाओं से न केवल हिंदुयों को बचना होगा बल्कि मुसलमानों को तो इनके खैरात कि दरियादिली से बिल्कुल ही किनारा कर लेना पड़ेगा .....
accha likha hai aapne...samay mile to hamare blog par bhi visit kare.
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